गुरु पूर्णिमा विशेष : इस दलित महिला ने परिस्थितियों को बनाया अपना गुरु, 25 गांवों में बंद कराया मृत्युभोज


अलवर. इच्छाशक्ति मजबूत हो तो दुनिया की बड़ी से बड़ी समस्या घुटने टेक देती है। ऐसी ही मजबूत इच्छाशक्ति वाली दलित महिला ने अलवर जिले के 25 गांवों से मृत्युभोज की सदियों पुरानी कुरीति को दुम दबाकर भागने को मजबूर कर दिया।


हालांकि महिला को इसके लिए सभी गांवों के पंच-पटेलों का प्रखर विरोध सहना पड़ा लेकिन उसने हार नहीं मानी और अंतत: उन्हें महिला के आगे सिर झुकाकर इस कुरीति को अंतिम प्रणाम करना पड़ा। महिला अपने गांव की पंचायत की सदस्य भी है।
अलवर शहर के समीप बेलाका गांव की पंच बबीता का परिवार बेहद मुश्किल से पेट भरता था। इस बीच 2005 में उसके ससुर की मौत हो गई और परिवार को मृत्युभोज की कुरीति को कर्ज लेकर निभाना पड़ा। इस कर्ज ने बबीता के परिवार की आर्थिक स्थिति जर्जर कर दी और बच्चों की पढ़ाई की फीस तक चुकाने में परेशानी आने लगी।
बबीता इससे जूझ ही रही थी कि अचानक उसके जेठ की मौत हो गई और गांव की ओर से फिर मृत्युभोज देने का दबाव पडऩे लगा। पहले से ही कर्ज में दबी बबीता इस बार सीना तानकर उठ खड़ी हुई और उसने परिवार को मृत्युभोज नहीं देने के लिए मना लिया।