आज का सम्पादकीय : जब मैं जम्मू-कश्मीर की बात करता हूं तो उसमे पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) भी सम्मिलित होता है

अमित शाह का बयान जम्मू कश्मीर मतलब पीओके भी शामिल , हम पीओके लिए अपनी जान दे देंगे!
देश का मूड समझ नही पा रहें है कांग्रेस के वरिष्ठ नेता

आज मंगलवार को लोकसभा में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि जब मैं जम्मू-कश्मीर की बात करता हूं तो उसमे पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) भी सम्मिलित होता है। शाह ने यह भी कहा कि क्या कांग्रेस या विरोधी दल पीओके को भारत का अंग नही मानते है , हम तो पीओके के लिए अपनी जान दे देंगे। 
देश के गृहमंत्री ने लोकसभा को बताया कि 1952 और 1965 में कांग्रेस सरकार के समय में राष्ट्रपति ने अपने अधिकारों का उपयोग इसी प्रकार किया था जो आज जम्मू-कश्मीर में किया जा रहा है और यह ससंद की अनुमति से ही किया जा रहा है इसलिए कांग्रेस और अन्य का विरोध बेमानी है। 
यही है देश का मूड और हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और गृहमंत्री श्री अमित शाह इस बात को अच्छी तरह समझ रहे है। 
इधर गुलाम नबी आजाद, अधीर चन्दन चैधरी, मनीष तिवारी जैसे कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता कांग्रेस को रसातल में ले जाने में लगे हुए है। जम्मू-कश्मीर में धारा 370 को हटाने की घोषणा पर पूरा देश खुशियां मना रहा है और इस खुशी में कांग्रेस के युवा तुर्क भी शामिल है। सोशल मीडिया में कई युवा कांग्रेसी नेताओं ने बधाई दी है । यहां हिन्दू-मुस्लिम जैसा कोई भी साम्प्रदायिक मामला नही है , यह तो देश भक्ति का मामला है । इस घोषणा से सभी हिन्दुस्तानी भले ही वो हिन्दू हो, मुस्लिम हो, सिक्ख हो, ईसाई हो या अल्पसंख्यक समुदाय के लोग, सभी हिन्दुस्तानी खुश है । खुश तो हमारा दुश्मन देश पाकिस्तान नही है और इसका कारण भी यही है कि पाकिस्तान के नेताओं की नेतागिरी भारत के विरोध से ही चल रही है। 
इसमें कोई दो राय नही है कि केन्द्र सरकार के इस निर्णय से जम्मू-कश्मीर का विकास होगा और शांति बहाल होगी । जम्मू-कश्मीर हमारे देश का अभिन्न अंग है और हमारे अभिन्न अंग के विकास के लिए हम कोई भी निर्णय ले सकते है और इस निर्णय में पाकिस्तान का विरोध बेमानी है। कांग्रेस को यह नही भूलना चाहिए कि गोवा को उनकी कांग्रेस सरकार ने किस तरह से देश का हिस्सा बनाया था और कांग्रेस सरकार का यह कार्य सराहनीय था।     
अब हम बात करते है पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफती, फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला की तो इन लोगों के बयानों से यह स्पष्ट होता है कि यह हिन्दुस्तान की बात तो करते ही नही है । यह और इनकी पार्टी हिन्दुस्तान की खिलाफत करते हुए अपनी सियासी रोटियां सेंक रहे है । इन जैसे नेताओं ने ही जम्मू-कश्मीर में कभी शांति नही होने दी । पिछले बरसों में कांग्रेस के कुछ कतिपय नेताओं के सपोर्ट से जम्मू -कश्मीर में इनका षडयंत्र हमेशा कामयाब होता रहा । 
कांग्रेेस को समझना होगा कि अब देश के राजनीतिक हालात बदल गए है। देश की जनता जागरूक होकर अपने अधिकारों के लिए सजग होकर देश के हित की बात समझने लगी है और गलत बात का विरोध करना शुरू कर दिया गया है।  इस सभी में सोशल मीडिया एक बड़ी क्रांति के रूप में सामने आया है । जहां एक ओर सोशल मीडिया प्रचार का एक सशक्त माध्यम बन चुका है वहीं कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अभी भी पचास साल पहले वाली ही लकीर पर चल रहे है। राष्ट्रवाद को नकारना कांग्रेस की सबसे बड़ी भूल है।  
जम्मू-कश्मीर के मामले में कांग्रेस के नेताओं के विरोध ने पूरे देश में कांगे्रस के खिलाफ अन्दर ही अन्दर विरोध पैदा कर दिया है। जहां प्रियंका गांधी की सक्रियता से कांग्र्रेस में जोश दिखाई दे रहा था। क्या यह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अब उस जोश को खत्म करना चाहते है ? 
कांग्रेस का विरोध का निर्णय कितना गलत है, यह राज्यसभा में कांग्रेस के चीफ व्हिप भुवनेश्वर कलीता के इस्तीफे से स्पष्ट हो गया है। कलीता की समझदारी है कि उन्होने देश के मूड को देखते हुए कांग्रेस से ही नाता तोड़ लेने का निर्णय ले लिया । 
जहां राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लगातार काम करते हुए जनहित के निर्णय लेकर कांग्रेस को मजबूत कर रहे है वहीं कांगे्रस के कुछ वरिष्ठ नेताओं के ऐसे निर्णय गहलोत के कार्यो से हुई कांग्रेस की मजबूती को कमजोर करने का काम कर रहा है। 
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं , अब भी देश के मूड को समझ कर निर्णय लेना शुरू कर दो अन्यथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कांग्रेस मुक्त अभियान जल्दी ही पूरी तरह सफल हो जाएगा ।