भारत-चीन रिश्‍तों का 'सेतु' बना कृष्‍णा बटर बॉल



   दक्षिण भारत के प्राचीन शहर महाबलीपुरम में शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की मुलाकात में गर्मजोशी देखने को मिली। प्रधानमंत्री मोदी चीनी राष्‍ट्रपति को 'कृष्‍णा बटर बॉल' द‍िखाने ले गए।














कृष्णा बटर बॉल के पास शी चिनफिंग और पीएम मोदी






हाइलाइट्स:



  • महाबलीपुरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के राष्‍ट्रपति शी चिनफिंग का भव्‍य स्‍वागत किया

  • पीएम मोदी ने चीनी राष्‍ट्रपति को महाबलीपुरम के मंदिरों और संस्‍कृति से रू-ब-रू कराया

  • प्रधानमंत्री मोदी शी चिनफिंग को 250 टन वजनी पत्‍थर 'कृष्‍णा बटर बॉल' भी दिखाने ले गए

  • यह पत्‍थर 1300 वर्षों से भूकंप, सूनामी, चक्रवात को झेलने के बावजूद अपनी जगह पर टिका है



चेन्‍नै
तमिलनाडु के ऐतिहासिक शहर महाबलीपुरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के राष्‍ट्रपति शी चिनफिंग का भव्‍य स्‍वागत कर 'दोनों एशियाई शेरों' के बीच रिश्‍ते में गर्माहट लाने की जोरदार कोशिश की। प्रधानमंत्री मोदी ने चीनी राष्‍ट्रपति को महाबलीपुरम के मंदिरों और दक्षिण भारतीय संस्‍कृति से रू-ब-रू कराया। दोनों नेताओं की एक तस्‍वीर अब सोशल मीडिया में लोगों के कौतूहल का विषय बन गई है। इस तस्‍वीर में पीएम मोदी और शी चिनफिंग के पीछे एक बड़ा सा पत्‍थर दिखाई दिखाई दे रहा है जो बेहद खतरनाक तरीके से आगे की ओर काफी झुका हुआ है।


 



आइए जानते हैं कि क्‍या है इस पत्थर का इतिहास...
 

1300 साल से टिका है 250 टन वजनी 'कृष्णा बटर बॉल'
दरअसल, यह 250 टन वजनी पत्‍थर 'कृष्‍णा बटर बॉल' है जो पिछले करीब 1300 सौ वर्षों से भूकंप, सुनामी, चक्रवात समेत कई प्राकृतिक आपदाओं के बाद भी अपने स्‍थान पर बना हुआ है। यही नहीं इस पत्‍थर को हटाने के लिए कई बार मानवीय प्रयास किए गए लेकिन सभी विफल रहे। दुनियाभर से महाबलीपुरम पहुंचने वाले लोगों के लिए प्राकृतिक पत्‍थर से बना

 



'आकाश के भगवान का पत्‍थर'
कृष्‍णा बटर बॉल या वानिराई काल (आकाश के भगवान का पत्‍थर) एक पहाड़ी के ऊपर स्थित है। 20 फीट ऊंचा और 5 मीटर चौड़ा यह पत्‍थर करीब 250 टन वजनी है। यह विशालकाय पत्‍थर पहाड़ी पर बेहद कम स्‍थान पर खड़ा है जिससे ऐसा लगता है कि यह कभी भी गिर सकता है। इसी वजह से रिस्‍क उठाने वाले लोग ही इस पत्‍थर के नीचे बैठते हैं। यह पत्‍थर करीब 45 डिग्री के स्‍लोप पर पिछले 1300 साल से महाबलीपुरम में है।

पत्थर पर गुरुत्वाकर्षण शक्ति बेअसर
इस पत्‍थर पर गुरुत्‍वाकर्षण का भी कोई असर नहीं है। उधर, स्‍थानीय लोगों का मानना है कि या तो ईश्‍वर ने इस पत्‍थर को महाबलीपुरम में रखा था जो यह साबित करना चाहते थे कि वह कितने शक्तिशाली हैं या फिर स्‍वर्ग से इस पत्‍थर को लाया गया था। वहीं वैज्ञानिकों का मानना है कि यह चट्टान अपने प्राकृतिक स्‍वरूप में है। भूवैज्ञानिकों का मानना है कि धरती में आए प्राकृतिक बदलाव की वजह से इस तरह के असामान्‍य आकार के पत्‍थर का बटर बॉल द‍िखाते पीएम मोदी

'भगवान कृष्‍ण का माखन'
इस बीच हिंदू धर्मावलंबियों का मानना है कि भगवान कृष्‍ण अकसर अपनी मां के मटके से माखन चुरा लेते थे और यह प्राकृतिक पत्‍थर दरअसल, श्रीकृष्‍ण द्वारा चुराए गए मक्‍खन का ढेर है जो सूख गया है। कृष्‍णा बॉल को देखकर ऐसा लगता है कि यह कभी भी गिर सकता है लेकिन इस पत्‍थर को हटाने के लिए पिछले 1300 साल में कई प्रयास किए गए लेकिन सभी विफल रहे। पहली बार सन 630 से 668 के बीच दक्षिण भारत पर शासन करने वाले पल्‍लव शासक नरसिंह वर्मन ने इसे हटवाने का प्रयास किया। उनका मानना था कि यह पत्‍थर स्‍वर्ग से गिरा है, इसलिए मूर्तिकार इसे छू न सकें। पल्‍लव शासक का यह प्रयास विफल रहा।

सात हाथी मिलकर भी नहीं हटा सके यह पत्‍थर
वर्ष 1908 में ब्रिटिश शासन के दौरान मद्रास के गवर्नर आर्थर लावले ने इसे हटाने का प्रयास शुरू किया। लावले को डर था कि अगर यह विशालकाय पत्‍थर लुढ़कते हुए कस्‍बे तक पहुंच गया तो कई लोगों की जान जा सकती है। इससे निपटने के लिए गवर्नर लावले ने सात हाथियों की मदद से इसे हटाने का प्रयास शुरू किया लेकिन कड़ी मशक्‍कत के बाद भी यह पत्‍थर टस से मस नहीं हुआ। आखिरकार गवर्नर लावले को अपनी हार माननी पड़ी। अब यह पत्‍थर स्‍थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है।

भारत-चीन रिश्‍तों का 'सेतु' बना कृष्‍णा बटर बॉल
वर्तमान समय में विज्ञान के इतना प्रगति करने के बाद भी अब तक यह पता नहीं चल पाया है कि 4 फीट के बेस पर यह 250 टन का पत्‍थर कैसे टिका हुआ है। कुछ लोगों का यह दावा है कि पत्‍थर के न लुढ़कने की वजह घर्षण और गुरुत्‍वाकर्षण है। उनका कहना है कि घर्षण जहां इस पत्‍थर को नीचे फिसलने से रोक रहा है, वहीं गुरुत्‍कार्षण का केंद्र इस पत्‍थर को 4 फीट के बेस पर टिके रहने में मदद कर रहा है। इतिहास को पसंद करने वाले चीनी राष्‍ट्रपति को पीएम मोदी ने कृष्‍णा बटर बॉल दिखाकर दोनों देशों के बीच रिश्‍ते में इस विशालकाय पत्‍थर की तरह मजबूती लाने की भरपूर कोशिश की