महाराष्ट्र नई सरकार गठन संकट:विनाश काले विपरीत बुद्धि !!

  ये वही शिवसेना है जिसके संस्थापक स्व श्री बाला साहेब हिंदुत्व के एक मात्र कद्दावर चेहरा हुआ करते थे, जिसके बोलने मात्र से महाराष्ट्र धधक उठता था, जो सुप्रीम कोर्ट से लेकर केंद्र की सरकारों तक को ठेंगे पे रखते थे, एक दौर था जब किसी भी शिवसैनिक के हाँथ में शिवसेना का मुखपत्र सामना होता था तो टोपिबाज़ रास्ता बदल लेते थे हाँ उस दौर में भी जब मुंबई में दाऊद का आतंक अपने चरम पे था, ये वही शिवसेना है जिसके शिवसैनिकों ने सत्ता को सदैव जूते की नोंक पर रखा.... महाराष्ट्र में सत्ता ना होने पर भी एकछत्र दबदबा रखा, लोगों के दिलों पे राज किया तो उसके पीछे एकमात्र कारण था कि शिवसेना का कभी भी हिंदुत्व के मार्ग से समझौता नहीं करना।


बेहद दुख हुआ इसके नए नवेले नेता को दरगाहों पर मत्था टेकने जाते देख।


कुर्सी के लिए छल और ब्लैकमेलिंग करते देख आज स्व बाला साहेब की आत्मा निश्चित तौर पर दुःखी हो रही होगी।


भाजपा को चाहिए कि शिवसेना को कह दे कि जाओ बना लो सरकार, जिसका समर्थन लेना है ले लो.... हम विपक्ष में बैठेंगे।


आदित्य ठाकरे को चने के झाड़ पर चढ़ाकर कुछ लोग अपना उल्लू सीधा करना चाहते हैं, लेकिन अनुभवहीन, उतावले और हिंदुत्व से कट चुके इनके इस युवा को काश कोई समझाता कि बेटा अपनी राजनीति को यूँ बर्बाद मत कर, पहले शिवसेना का वो जलवा तो वापस ले आ जो कभी बाला साहेब के दौर में हुआ करता था, आज ना तुम्हारी ना तुम्हारे पिता की महाराष्ट्र में इतनी भी ज़मीन नहीं बची कि अकेले लड़के 25 सीटें भी ले आओ.... आज भी जो शिवसेना को वोट देते हैं वो केवल और केवल स्व बाला साहेब की पुण्याई है, भाजपा से गठबंधन ना होता तो 50 का आँकड़ा भी सपना होता।


ख़ैर.... भाजपा को चाहिए कि इसे इसके हाल पर छोड़ दे, कोई समझौता करने की आवश्यकता नहीं, इनकी ज़मीनी सच्चाई यही है कि ये अपने बूते आज 25 सीटें भी नहीं ला सकते, इन्हें अपनी राजनीतिक मृत्यु ही करवानी है वो भी सदा के लिए तो यही सही.... भाजपा को किसी सूरत में झुकने की कोई आवश्यकता नहीं।


जय श्रीराम