अयोध्या पर😲 फैसला- सुप्रीम कोर्ट से फैसले से खुश👎 नहीं है पर्सनल लॉ बोर्ड, लेकिन करता है 👌फैसले का सम्मान*

 


सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को अयोध्या में विवादित स्थल राम जन्मभूमि पर मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मस्जिद का निर्माण 'प्रमुख स्थल' पर किया जाना चाहिए और सरकार को उस स्थान पर मंदिर निर्माण के लिये तीन महीने के भीतर एक ट्रस्ट गठित करना चाहिए जिसके प्रति अधिकांश हिन्दुओं का मानना है कि भगवान राम का जन्म वहीं पर हुआ था। कोर्ट के निर्णय पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने निराशा जताई है।


लॉ बोर्ड के जफरयाब जिलानी ने कहा, 'हम इस निर्णय पर मशविरा करेंगे कि इस पर रिव्यू फाइल करें कि नहीं। सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट का आदर करते हैं और पूरे मुल्क अनुरोध करते हैं कि वो इस जजमेंट को लेकर कोई प्रदर्शन ना करें। निर्णय से हम खुश नहीं नहीं हैं। हम कोर्ट के निर्णय के हर पार्ट की आलोचना नहीं कर रहे हैं लेकिन कुछ पार्ट से हम सहमत नहीं हैं। जजमेंट पढ़कर आगे का फैसला करेंगे।


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, शीर्ष अदालत ने एक लैंडमार्क जजमेंट दिया है। मेरी सभी लोगों से अपील है कि शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखें।' हिंदू महासभा के वकील वरुण कुमार सिन्हा ने कहा- यह एक ऐतिहासिक फैसला है। इस फैसले के साथ, सर्वोच्च न्यायालय ने विविधता में एकता का संदेश दिया है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा- सभी को शीर्ष अदालत का फैसला स्वीकार करना चाहिए और शांति का माहौल बनाए रखा चाहिए।


बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने कहा, 'सभी को शीर्ष अदालत के फैसले का स्वागत करना चाहिए। सामाजिक सौहार्द के लिए ये बहुत लाभकारी होगा। इस मामले पर अब आगे कोई विवाद नहीं होगा, ऐसी मैं उम्मीद करता हूं। मेरी सभी से अपील है कि शांति बनाए रखें।' मुस्लिम पैरोकार इकबाल अंसारी ने कहा, 'मुझे खुशी है कि सुप्रीम कोर्ट ने आखिरकार इस मामले पर अपना फैसला सुना दिया। मैं कोर्ट के इस फैसले का सम्मान करता हूं।'


फैसले पर कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का सम्मान करती है। हम सभी संबंधित पक्षों व सभी समुदायों से निवेदन करते हैं कि भारत के संविधान में स्थापित 'सर्वधर्म सम्भाव' और भाईचारे के उच्च मूल्यों को निभाते हुए अमन-चैन का वातावरण बनाए रखें। हर भारतीय की जिम्मेदारी है कि हम सब देश की सदियों पुरानी परस्पर सम्मान और एकता की संस्कृति व परंपरा को जीवंत रखें।