बंग्लादेश का उदय एव इसके नायक स्वर्गीय जनरल सगत सिंह राठौड़

बांग्लादेश पर भारत की महान विजय  का असली सच जिसे इंदिरा गांधी और जगजीत सिंह अरोड़ा के द्वारा छिपाया गया  जैसा कि हमेशा से भारत में होता आया है 


मैं जब जब भी स्वर्गीय जनरल सगत सिंह राठौड़ जी की वीरगाथा पढ़ता हूँ तो मेरा रोम रोम गर्व की अनुभूति करता है,
सगत सिंह राठौड़ जी की गिनती भारत ही नही बल्कि विश्व के सर्वश्रेष्ठ सेनानायकों में होती है।


दिन 16 दिसम्बर 1971 को पाकिस्तान के 93 हजार सैनिको ने ढाका में भारतीय सेना के समक्ष आत्मसमर्पण किया था और पाकिस्तान से कटकर एक अलग देश बांग्लादेश का जन्म हुआ था।


भारत की इस ऐतिहासिक विजय के महानायक थे, 
"लेफ़्टिनेंट जनरल सगत सिंह राठौड़" जी।


अपने सैनिकों के साथ 4 किलोमीटर चौड़ी उफनती हुई मेघना नदी (हेलीकॉप्टर की मदद से एयरब्रिज बनाकर) पार करके सीधे ढाका पहुंच जाने का उनका दुस्साहसिक निर्णय ही इस युद्ध का टर्निंग पॉइंट सिद्ध हुआ!!
यह कदम उन्होंने बिना उच्चाधिकारियों की अनुमति के उठाया था, इसके लिए उनके उच्चाधिकारी जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा ने इन्हें फोन पर चेतावनी दी और वापस आने की हिदायत दी,
लेकिन सगत सिंह ने जगजीत सिंह अरोड़ा को जवाब दिया कि "
''He said, "Jaggi, over my dead body".
उन्होंने जगजीत सिंह अरोड़ा को यह भी कहा कि हम नदी पार करके ढाका पर हमला नही करेंगे तो क्या यहाँ बैठकर अंडे देंगे????


तब जगजीत सिंह अरोड़ा ने सगत सिंह की शिकायत आर्मी चीफ और प्रधानमन्त्री इंदिरा गांधी से की,प्रधानमन्त्री भी इस दुस्साहस पर चिंतित हुई, 
किन्तु आर्मी चीफ सैम मानेकशा को सगत सिंह की काबिलियत पर पूरा भरोसा था।


जैसे ही पाकिस्तानी कमांडरों को भारतीय सेना के इतनी जल्दी ढाका पहुंचने की अविश्वसनीय खबर मिली उनके हाथ पांव फूल गए, जबकि ढाका का घेराव करने वाली भारतीय टुकड़ी से 10 गुना अधिक पाकिस्तानी सैनिक वहां मौजूद थे,लेकिन पाकिस्तानी कमांडरों का हौसला पस्त हो चुका था।।


अब आत्मसमर्पण की वार्ता के लिए तब के मेजर जनरल ऍफ़ आर जैकब को पाकिस्तानी कैंप में भेजा गया,और पाकिस्तानी कमांडर नियाजी सरेंडर के लिए तैयार हो गया।
नियाजी ने अपने 93000 सैनिको के साथ लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया और बांग्लादेश नाम के अलग देश का जन्म हुआ।।


दुर्भाग्य की बात है कि आज सभी भारतीय उन जगजीत सिंह अरोड़ा को भारत की विजय का नायक मानते हैं जिन्होंने मेघना नदी पार करके ढाका पर हमले के विरुद्ध सगत सिंह को चेतावनी दी थी और दिल्ली में उनकी शिकायत भी की थी,
आज सभी ऍफ़ आर जैकब को जानते हैं जिन्हें नियाजी से आत्मसमर्पण की वार्ता करने भेजा गया था,


पर पाकिस्तानी सेना के 30 हजार सैनिको को अपने मात्र 3 हजार सैनिको के साथ उफनती हुई मेघना नदी पार करके ढाका में घेरकर सरेंडर को मजबूर कर देने वाले लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह राठौड़ को आज कितने भारतीय जानते हैं????


उस युद्ध में भाग लेने वाले लेफ्टिनेंट जनरल ओपी कौशिक ने लिखा है कि 
""'General J S Aurora, the commander of the Indian forces in the East, asked General Sagat Singh to withdraw his troops who were on the move to Dacca -- but he refused.'
'He said, "Jaggi, over my dead body".'
'Therefore, I say the creator of Bangladesh was General Sagat Singh.'
Lieutenant General O P Kaushik salutes the incredible soldiers who turned the tide in the 1971 War""