काशी में “डेस्टीनेशन नार्थ ईस्ट समारोह” का केंद्रीय मंत्री ने किया शुभारम्भ

 


 संगीत के दिग्गज कलाकार भी देंगे प्रस्तुति ,26 को होगा समापन



वाराणसी। पूर्वोत्तर राज्यों की सांस्कृतिक विरासत से सीधा अनुभव कराने के उद्देश्य से “डेस्टीनेशन नार्थ ईस्ट” का आयोजन में वाराणसी में शुरू हो गया है। पहली बार वाराणसी में आयोजित इस समारोह का उद्घाटन केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (स्वतंत्र प्रभार) राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि आज से वाराणसी में शुरू हो यह चार दिवसीय आयोजन गंगा और ब्रह्मपुत्र की दो समृद्ध संस्कृतियों का फ्यूजन प्रदान करेगा। वाराणसी खुद सांस्कृतिक रूप से समृद्ध रहा है और इसलिए गंगा घाट पर ब्रह्मपुत्र उत्सव का चयन किया गया है। इससे लोग भारत की सांस्कृतिक विविधता से रूबरू होंगे और साथ ही पूरे भारत के लोगों को पूर्वोत्तर भारत को समझने में मदद मिलेगी। 23 से 26 नवम्बर 2019 तक आईआईटी, बीएचयू के परिसर में आयोजित इस समारोह में पूर्वोत्तर क्षेत्र के सभी आठ राज्य अपने-अपने राज्यों के हस्तशिल्प, हथकरघा, जैविक उत्पादों और सांस्कृतिक दलो के साथ भागीदारी कर रहे हैं।


पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित इस चार दिवसीय कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मंत्री डा.जितेंद्र सिंह के साथ पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास सचिव डॉ. इंदरजीत सिंह, पूर्वोत्तर परिषद के सचिव श्री के मॉस चेलाई, आसाम राइफल के डायरेक्टर जनरल सुखदीप सांगवान, अभिनेत्री जीनत अमान, पूर्व क्रिकेटर आरपी सिंह, बीएचयू के कुलपति श्री राकेश भटनागर भी मौजूद रहे। डा.जितेंद्र सिंह ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत देशभर के युवाओं के लिए बेहतरीन अवसर उपलब्ध करा रहा है। आज युवा उद्यमी नए अवसरों के लिए पूर्वोत्तर भारत का दौरा कर रहे हैं। मंत्रालय की ओर से स्टार्ट-अप के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। ऐसे में देशभर के युवाओं को यह आकर्षित कर रहा है।
उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर भारत के विकास माडल जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख सहित देश के अन्य हिस्सों के विकास के लिए एक संदर्भ बिंदू की तरह विकसित हो गया है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य शेष भारत को पूर्वोत्तर के समीप लाना और उन्हें पूर्वोत्तर क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति का अनुभव कराना है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कार्यभार संभालने के बाद से ही पूर्वोत्तर क्षेत्र का विकास केंद्र सरकार की प्राथमिकता में रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने कार्यकाल में पूर्वोत्तर क्षेत्र का तीस से अधिक बार दौरा किया। डॉ.जितेन्द्र सिंह ने पूर्वोत्तर भारत में हुए विकास पर चर्चा करते हुए कहा कि देश के अन्य हिस्सों से संपर्क बढ़ाने के लिए रेल, सड़क मार्ग और हवाई मार्ग के क्षेत्र में कई पहल किए गए हैं। श्री जितेन्द्र सिंह ने कहा कि वाराणसी में “डेस्टीनेशन नार्थ ईस्ट” समारोह में एक बांस पैवेलियन की स्थापना की गई है। समारोह के दौरान एक दिन व्यापारिक समुदाय को पूर्वोत्तर राज्यो में अवसरों का पता लगाने के लिए व्यापार सत्र का आयोजन भी किया जा रहा है।


“डेस्टीनेशन नार्थ ईस्ट” का आयोजन इससे पूर्व दिल्ली और चंडीगढ़ में किया जा चुका है।  वाराणसी में “डेस्टीनेशन नार्थ ईस्ट” समारोह में एक बांस पैवेलियन की स्थापना की गई है। समारोह के दौरान दर्शकों को पूर्वोत्तर राज्यो के कारीगरों और कलाकारों द्वारा उनके हथकरघे और हस्तशिल्प का सीधा अनुभव देखने का अवसर प्राप्त हो रहा है। दिन में कलाकार खुले मंच पर नृत्य-संगीत का प्रदर्शन भी कर रहे हैं। चार दिवसीय कार्यक्रम में देशी खेलों का आयोजन भी किया जा रहा, जहां दर्शक भी भागीदारी कर सकते हैं। समारोह में पूर्वोत्तर और उत्तर प्रदेश के व्यंजनों का आनंद दर्शक अपने सामने सीधे बनते हुए ले रहे हैं। समारोह में केंद्र सरकार की विभिन्न एजेंसी जैसे नोर्थ ईस्टर्न रीजन कम्यूनिटी रिसोर्स मैनेजमेंट (एनईआरसीओआरएमपी), केन एंड बम्बू टेक्नोलोजी सेंटर (सीबीटीसी), नोर्थ ईस्टर्न रीजनल एग्रीकल्चर मार्केटिंग कार्पोरेशन लिमिटेड (एनईआरएएमएसी), नोर्थ ईस्टर्न हैंडीक्राफ्ट एंड हैंडलूम डेवलपमेंट कार्पोरेशन (एनईएचएचडीसी), ललित कला अकादमी और अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक संबंध केंद्र भी भागीदारी है। संगीत पूर्वोत्तर क्षेत्र की आत्मा है। डेस्टीनेशन नार्थ-ईस्ट समारोह में पूर्वोत्तर क्षेत्र के बड़े कलाकारों के साथ-साथ देश के अन्य भागों के कलाकार भी अपनी प्रस्तुति दे रहे हैं। इसमें शिलांग चैंबर चॉयर, पपोन, सौरभि देवबर्मा, बॉरकुंग ह्रेंगखाब्ल, रेखा भारद्वाज जैसे प्रमुख कलाकारो में शामिल हैं। जैविक उत्पादों के संदर्भ में पूर्वोत्तर राज्यों के महत्व को ध्यान में रखते हुए जैविक उत्पादों, खाद्य प्रसंस्करण, पर्यटन, जल विकास जैसे विषयों पर हर समूह  संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है और इसमें विषय से जुड़े विशेषज्ञ भी भागीदारी कर रहे हैं।


पूर्वोत्तर क्षेत्र में पर्यटकों के लिए इको-पर्यटन, संस्कृति, विरासत और व्यापार के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत और संस्कृति क्षेत्र को शेष भारत से एक अलग पहचान दिलाती है। आठ पूर्वोत्तर राज्यों में कला और शिल्प क्षेत्र में विविधता क्षेत्र की एक ओर प्रमुख पहचान है। पूर्वोत्तर राज्यों में हस्तशिल्प हर किसी की दिनचर्या का एक हिस्सा है। “डेस्टीनेशन नार्थ ईस्ट समारोह” के दौरान उत्तर पूर्वी राज्यों के हर रूप की झलक मिल रही है और लोगों को नजदीक से समझने और देखने का मौका दे रहा है।