शिवसेना केवल कुर्सी ही नहीं हारी बल्कि सत्ता, विचारधारा और प्रतिष्ठा की लड़ाई भी हार गयी…

 


     जो पार्टी हमेशा मराठों की शान और हिंदुओं के अधिकारों की बात करती रही, उसने अचानक से शिव के नाम से ही दूरी बना ली! इतना ही नहीं बल्कि पार्टी मुसलमानों को 5% आरक्षण देने की बात भी कर गई! आज के समय में सत्ता के लालच में शिवसेना ने वह सब किया जो बाला साहब की हिंदूवादी शिवसेना कभी सपने में भी नहीं सोच सकती थी! शिवसेना से कथित तौर पर एनसीपी और कांग्रेस ने सलाह दी कि इस गठबंधन का नाम महाशिव अघाड़ी से बदलकर महा विकास अघाड़ी रखा जाए तो शिवसेना इस पर भी तैयार हो गई!


महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले 10 घंटों में इतना सब कुछ हो गया जो किसी ने सोचा भी नहीं था! पिछले कुछ समय से शिवसेना बड़ा दावा ठोक रही थी महाराष्ट्र राज्य को मुख्यमंत्री शिवसेना ही देगी! लेकिन पिछले 10 घंटे में सब कुछ बदल गया! देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री की शपथ भी ले ली अजित पवार ने उप मुख्यमंत्री की शपथ ली! शिवसेना पिछले कुछ समय से कुर्सी के लालच में उन्होंने अपने हिंदुत्व और मूल सिद्धांतों की धज्जियां उड़ाई! जिसके चलते ऐसा महसूस हो रहा था की सत्ता से ऊपर कोई सिद्धांत नहीं होता! इसके लिए उद्धव ठाकरे एनसीपी कांग्रेस किसी भी शर्त को मानने के लिए तैयार हो गए! महाराष्ट्र की राजनीति में चल रहे इस ड्रामे से शिवसेना को हासिल तो कुछ नहीं हुआ! लेकिन वही पार्टी को देने वाले वोटर्स, कार्यकर्ता, शिवसैनिक सबको यह अनुमान हो गया है कि शिवसेना मुखिया उद्धव ठाकरे का चेहरा क्या है! उनकी सत्ता की भूख सबके सामने एक्सपोज हो गई!
शिवसेना के नेता संजय राउत कि भारत का आधार ही धर्मनिरपेक्षता है! उन्होंने कहा कि आप किसान, बेरोजगारों से उनका धर्म या उनकी जात नहीं पूछ सकते, देश के सभी लोग धर्मनिरपेक्ष है! छत्रपति शिवाजी महाराज ने भी अपने साथ सभी लोगों को लेकर चला और वही बाला साहब ठाकरे ने कोर्ट में शपथ लेने से पहले धार्मिक ग्रंथों के स्थान पर संविधान को रखने का प्रस्ताव पेश किया! आपकी जानकारी के लिए बता दे एनसीपी और कांग्रेस ने शिवसेना को सेक्युलर रहने के लिए कहा था, शिवसेना उनके इस मत पर भी राजी हो गई थी!
उद्धव ठाकरे और संजय राउत ने ऐसे ऐसे कदम उठाए, जिससे पार्टी का भविष्य खतरे में दिखाई दे रहा है! केंद्र सरकार में शिवसेना ने अपना पद गवा दिया! बीएमसी मैं कुर्सी जाने का खतरा मंडरा रहा है!


    इतना ही नहीं बल्कि जो भाजपा के साथ गठबंधन कर डिप्टी सीएम का पद मिलता अब वह पद अजीत पवार के पास चला गया! यानी इस खेल में शिवसेना के हाथ कुछ भी नहीं लगा बस उसका चेहरा सबके सामने आ गया! जिसके कारण शिवसेना कभी भविष्य में हिंदुत्व की बात नहीं कर पाएगी! कुल मिलाकर देखा जाए तो शिवसेना ने एक ही झटके में अपनी विचारधारा का गला घोट दिया है! अब यह देखना दिलचस्प होगा शिवसेना किस एजेंडे के साथ आगे बढ़ती है और उसे लोग समर्थन देते हैं या नहीं!