डिस्कॉम्स को सुधारने के लिए ~1.1 लाख करोड़ का प्लान

*नई दिल्ली 
राज्यों की पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों (डिस्कॉम्स) का कामकाज बेहतर बनाने के लिए सरकार ने 1.1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की ग्रांट का प्रपोजल दिया है। इसके तहत अधिक नुकसान उठा रही डिस्कॉम्स को अपना बिजनेस प्राइवेटाइज करना होगा या डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी नियुक्त करने होंगे और इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड करने में निवेश करना होगा।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि इस स्कीम का नाम पहले अटल डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम इम्प्रूवमेंट योजना रखने पर विचार किया गया था। यह स्कीम तीन हिस्सों में होगी। उन्होंने कहा कि यह कामकाज में सुधार करने और नतीजे दिखाने से जुड़ी स्कीम है। इसमें डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियां पहले निवेश करेंगी और उन्हें बाद में ठीक प्रदर्शन करने पर फंड मिलेगा।
स्कीम के पहले हिस्से में लगभग 2,30,000 करोड़ रुपये के खर्च से स्मार्ट मीटर लगाने सहित इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड किया जाएगा। इसमें से 15 पर्सेंट फंड केंद्र सरकार और 10 पर्सेंट राज्य सरकार देगी।
दूसरे हिस्से में घाटे में चल रही डिस्कॉम्स को केंद्र से निवेश की सहायता लेने के लिए बड़े सुधार करने होंगे। इसमें डिस्कॉम्स के टेक्निकल और कमर्शियल लॉस को घटाकर 12 पर्सेंट पर लाया जाएगा और उनके रेवेन्यू और कॉस्ट के बीच अंतर को कम किया जाएगा। सरकार के डेटा से पता चलता है कि डिस्कॉम्स का एवरेज कमर्शियल लॉस 21.35 पर्सेंट और रेवेन्यू में अंतर 0.38 पैसे का है।
दूसरे हिस्से में केंद्र की ओर से राज्यों को लगभग 85,000 करोड़ रुपये की 60 पर्सेंट तक ग्रांट मिलेगी। दिए गए टारगेट से अधिक हासिल करने वाली डिस्कॉम्स को अतिरिक्त ग्रांट भी दी जाएगी।
अधिकारी ने बताया कि स्कीम के साथ जुड़ने के नौ महीनों के अंदर डिस्कॉम्स को एक पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल चुनना होगा या अपने ऑपरेशंस वाले सभी सर्कल में कई फ्रेंचाइजी के जरिए सप्लाई करनी होगी।
एसोसिएशन ऑफ पावर प्रोड्यूसर्स के डायरेक्टर जनरल अशोक खुराना ने कहा, 'डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के लिए पावर मिनिस्ट्री एक रिफॉर्म स्कीम बना रही है। इस तरह की पिछली स्कीमों की कमियों से बचने के लिए नई स्कीम के बारे में राज्यों के साथ विचार-विमर्श करना चाहिए।'
20 पर्सेंट से कम के कमर्शियल लॉस वाले राज्यों के पास कमर्शियल और फाइनेंशियल लॉस घटाने की एक योजना के लिए सहमति देकर अपने मौजूदा ऑपरेशंस को जारी रखने का विकल्प होगा। उन्हें प्रत्येक वर्ष ऑडिटेड एनुअल एकाउंट्स पब्लिश करने होंगे और सरकारी विभागों की बकाया रकम एक तय अवधि में चुकानी होगी।
स्कीम के तीसरे हिस्से में ह्युमन रिसोर्स को बेहतर बनाने और नई टेक्नोलॉजी पर जोर दिया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार 1,500 करोड़ रुपये की मदद देगी।