टेलिकॉम सेक्टर / देश में 141% कॉल बढ़ीं, पर 2 लाख टावर कम, 53% लोग कॉल ड्रॉप से परेशान


मुंबई (कुमुद दास).
देश में कॉल ड्रॉप की समस्या लगातार बनी हुई है। सेल्यूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने भास्कर को बताया कि पिछले तीन वर्षों में वॉइस कॉल 141 फीसदी बढ़ी हैं, जबकि अभी देश में दो लाख मोबाइल टावरों की कमी है।
यही कारण है कि देश में 53 फीसदी लोग कॉल ड्रॉप की गंभीर समस्या से परेशान हैं। 75 फीसदी यूजर्स तो कई बार वॉइस कॉल से परेशान होकर डेटा कॉल करते हैं। यह आंकड़ा भास्कर को लोकल सर्किल नेे उपलब्ध कराया है। ट्राई के पूर्व चेयरमैन सिद्धार्थ बेहुरा कहते हैं कि टेलिकॉम सेक्टर में तकनीक के स्तर पर आधुनिकीकरण की कमी कॉल ड्रॉप का एक बड़ा कारण है।


यूरोपीय और पश्चिमी देशों में ऐसी शिकायतें नहीं मिलती हैं। एक अनुमान के मुताबिक दिन में एक यूजर को दो बार कॉल ड्रॉप से परेशानी होती है। सेल्यूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के डीजी राजन एस मैथ्यू कहते हैं कि हमारे ऑपरेटर्स अब सेल्फ ऑप्टीमाइजिंग नेटवर्क, ऑटोमेटेड नेटवर्क प्लानिंग टूल्स और अपग्रेड सॉफ्टवेयर आदि का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर सुधरेगा।


भारती एयरटेल के सीईओ गोपाल वित्तल कहते हैं कि भविष्य में फिर कॉल दरें बढ़ सकती हैं। अगर ऐसा होता है तो कंपनियों के पास पैसा आएगा, जिससे कॉल ड्रॉप की समस्या सेे निपटने में कंपनियों को मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि अब कई शहरों में स्थानीय प्रशासन पुराने टावर्स को हटवा रहा है, जबकि मुंबई जैसे कई शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर करने के लिए खुदाई आदि करने में बेहद परेशानी आती है। एजीआर के तहत कंपनियों पर बकाया और जीएसटी के कारण भी कंपनियां इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश करने से कतरा रही हैं।


बीएसएनएल के रिटायर्ड चीफ जनरल मैनेजर जीसी पांडे कहते हैं कि जब एक टावर की रेंज दूसरी टावर की रेंज पर ओवरलेप करती है या एक टावर का सिग्नल दूसरे टावर के सिग्नल से टकराता है तब भी कॉल ड्रॉप की शिकायतें बढ़ती हैं। यही नहीं आमतौर पर टावर में तीन दिशाओं में एंटीना होता है। अगर एक एंटीना में भी परेशानी आती है तो कॉल ड्रॉप रेट बढ़ जाती है। पांडे बताते हैं कि टावर पर लोड बढ़ना भी कॉल ड्रॉप की एक प्रमुख वजह है। लोकल सर्किल्स के जनरल मैनेजर अक्षय गुप्ता कहते हैं कि सर्विस प्रोवाइडर्स को इंफ्रास्ट्रक्चर को जल्दी ही बेहतर करना होगा। बड़ी संख्या में लोग कॉल ड्रॉप से परेशान हैं। इसी कारण वे अपना नंबर भी पोर्ट कर रहे हैं।


भास्कर ने विशेषज्ञों से समझा क्यों कॉल ड्रॉप हो रही है


देश में अभी करीब 5 लाख टावर हैं जबकि जरूरत 7 लाख टावर्स की है। इंडस्ट्री के विशेषज्ञों के मुताबिक स्थानीय प्रशासन से खुदाई और टावर लगाने की इजाजत न मिलने के कारण समस्या बढ़ी है।
वॉइस ट्रैफिक इस समय प्रति माह प्रति यूजर 880 मिनट है। जबकि करीब तीन साल पहले यह आंकड़ा 365 मिनट था। यानी 141 फीसदी कॉल बढ़ गईं। इसी तरह प्रति यूजर 11 जीबी डेटा प्रति माह इस्तेमाल हो रहा है, जबकि तीन साल पहले यह 0.5 जीबी था। टावर पर लोड बढ़ा है।
अभी एवरेज रेवेन्यू प्रति यूजर (एआरपीयू) 125 रुपए प्रति यूजर है। जबकि कंपनियां बेहतर सर्विस दे पाएं इसके लिए 300 रु. प्रति यूजर चाहिए। कंपनियों ने दिसंबर में टैरिफ बढ़ाया है। अभी दाम और बढ़ेंगे।
स्पेक्ट्रम कम हैं। जो उपलब्ध हैं वो महंगे हैं। ऑपरेटर्स शिकायत करते हैं कि विदेशों के मुकाबले स्पेक्ट्रम 35 फीसदी महंगे हैं। हमारे ऑपरेटर्स 35 मेगा हर्ट्ज स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि बेहतर सेवा के लिए 400 मेगाहर्ट्ज की जरूरत है।
स्रोत: सीओएई, लोकल सर्किल, ओपन सिग्नल।